Saturday, October 30, 2010


यादें  तो  सम्हाल  के  रखेंगे   सभी  ,
चाहा  भी  तो   न  भूल  पाएंगे  कभी  
न  जाने  कब  फिर  मुलाकात  हो  ,
न  जाने  कब  फिर  वही  बात  हो 


अरमान   तो  था   की   साथ  रहे  हरदम 
हालत  ऐसीं  की   बेबश  हो  गए  हम 
दिल  बैठा  और  लो  कह  दिए   अलविदा  अभी ,
वादा हैं  मुस्कुराएंगे  जब  मिलेंगे  फिर  कभी

क्या करे हम शायद अब  इतना ही साथ था यहाँ
हरपल ह़र लम्हा याद आओगे ,चाहे जाऊ मैं जहाँ 
डरता हूँ की फिर मुलाकात हो न हो ,
फिर वही बात हो न हो






3 comments:

Sandeep Kumar said...

Very well composed !!!

Sujit Thakur said...

Thank you very Much Sandeep!! Keep posting!!!

Ajit said...

Keep it up!