Sunday, July 10, 2011

मैं  ने तन्हाई में जितनी रातें गुज़ारी हैं 
उन रातों का हिसाब होना बांकी हैं अभी 
तुम्हारे इंतज़ार में जो तडपा हूँ अबतक 
उस का इज़हार करना बांकी है अभी 

तुम्हारे नजदीकियों को तरसा हूँ अबतक 
तुम्हारा दीदार करने को तडपा हूँ अबतक 
पास हो तुम जब , रोक न पाउँगा खुद को 
बहक जाने को ही रोका  है दिल को अबतक 

2 comments:

amit said...

ha hisab kar ke rakha na ta bill hamra bhej da hum hisab andebao.

Sujit Thakur said...

Ho Amit, tora taklif kala diao...hum ka lebai na hisaab!!