मैं ने तन्हाई में जितनी रातें गुज़ारी हैं
उन रातों का हिसाब होना बांकी हैं अभी
तुम्हारे इंतज़ार में जो तडपा हूँ अबतक
उस का इज़हार करना बांकी है अभी
तुम्हारे नजदीकियों को तरसा हूँ अबतक
तुम्हारा दीदार करने को तडपा हूँ अबतक
पास हो तुम जब , रोक न पाउँगा खुद को
बहक जाने को ही रोका है दिल को अबतक
2 comments:
ha hisab kar ke rakha na ta bill hamra bhej da hum hisab andebao.
Ho Amit, tora taklif kala diao...hum ka lebai na hisaab!!
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